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Pawan Chaubey vs The State Of Uttar Pradesh

Supreme Court of India · (2023) 16 SCC 698 · 2022

दीवानी अपीलीय क्षेत्राति कार सिसविवल अपील संख्या 3668/2022 (विवशेष अनुमति याति*का (सी) संख्या 15501/2021 से उत्पन्न) पवन *ौबे .................... अपीलार्थी5 बनाम उत्तर प्रदेश राज्य एवं अन्य ................... प्रत्यर्थी5 (गण) विनण; य न्यायमूर्ति इंविदरा बनर्जी5 अनुमति प्रदान की गई। यह अपील अंति म विनण; य और आदेश विदनांक 18.08.2021 के विवरूद्ध है, सिर्जीसमें प्रत्यर्थी5 संख्या 4 द्वारा दायर रिरट याति*का डब्ल्यू सी संख्या 27656/2018 है, सिर्जीसमें प्रत्यर्थी5 संख्या 4 के उति* मूल्य की द क ु ान के लाइसेंस को रद्द करने के आदेश को *ुनौ ी दी गई है। हमारे समक्ष अपीलार्थी5 उति* मूल्य की द क ु ान के लिलए लाइसेंस का अनुव 5 आवंटी है। अपीलार्थी5 उति* मूल्य की द क ु ान *ला ा है। अपीलार्थी5 ने उद्घोषणा “क्षेत्रीय भाषा में अनुवाविद विनण; य वादी के अपनी भाषा में समझने हे ु विनबYति प्रयोग के लिलए है और विकसी अन्य उद्देश्य के लिलए प्रयोग नहीं विकया र्जीा सक ा है। सभी व्यावहारिरक और सरकारी उद्देश्यों के लिलए, विनण; य का अंग्रेर्जीी संस्करण प्रामाणिणक माना र्जीाएगा र्थीा विनष्पादन और विbयान्वयन के उद्देश्यों के लिलए मान्य होगा।" कणिर्थी रिरट याति*का में प्रत्यर्थी5 के रूप में शाविमल विकए र्जीाने के लिलए आवेदन विकया र्थीा। उक्त आवेदन पर विव*ार नहीं विकया गया। प्रत्यर्थी5 संख्या 4 की ओर से उपस्थिस्र्थी विवद्वान अति वक्ता और प्रत्यर्थी5 प्राति कारिरयों की ओर से उपस्थिस्र्थी विवद्वान अति वक्ता को सुनने के बाद , उच्च न्यायालय ने पाया विक लाइसेंसिंसग प्राति कारी ने प्रत्यर्थी5 संख्या 4 के विपछले आ*रण के आ ार पर लाइसेंस को पूरी रह से रद्द करने के लिलए आगे बढ़े र्थीे क्योंविक उनका लाइसेंस इससे पहले 2013-2014 में रद्द कर विदया गया र्थीा। उच्च न्यायालय का विव*ार र्थीा विक एक बार 2013-14 में विनलंबन के आदेश को विनरस् करने के बाद, लाइसेंस को उसके विपछले आ*रण के कारण रद्द नहीं विकया र्जीा सक ा र्थीा , लेविकन केवल नई सामग्री के आ ार पर सिर्जीस पर संबंति प्राति कारी **ा; करने के लिलए बाध्य र्थीा और आरोपों को साविब करने की आवश्यक ा र्थीी।ऐसा प्र ी हो ा है विक संबंति लाइसेंसिंसग प्राति कारिरयों ने प्रत्यर्थी5 संख्या 4 के लिnलाफ या ो अपीलीय प्राति कारी के समक्ष या उच्च न्यायालय के समक्ष आरोपों को साविब करने के लिलए कोई प्रयास नहीं विकया।उच्च न्यायालय ने विनष्कष; विनकाला विक प्राति कारिरयों ने अपीलक ा; के विपछले आ*रण के आ ार पर लाइसेंस रद्द करने के र्जीाल में फंस गए र्थीे। यह अपीलक ा; का मामला है विक अपीलक ा; को पक्षकार के रूप में शाविमल विकया र्जीाना *ाविहए र्थीा और उति* मूल्य की द क ु ान का लाइसेंस रद्द करने से पहले सुनवाई की र्जीानी *ाविहए र्थीी। इसमें कोई संदेह नहीं विक आक्षेविप आदेश सिर्जीसमें प्रत्यर्थी5 संख्या 4 के उति* मूल्य की दक ु ान के लाइसेंस को रद्द करने का आदेश रद्द कर विदया गया है सिर्जीससे उति* मूल्य द क ु ान लाइसेंस के बाद के आवंटी के रूप में अपीलक ा; के विह पर प्रति कूल प्रभाव डाल ा है। उद्घोषणा “क्षेत्रीय भाषा में अनुवाविद विनण; य वादी के अपनी भाषा में समझने हे ु विनबYति प्रयोग के लिलए है और विकसी अन्य उद्देश्य के लिलए प्रयोग नहीं विकया र्जीा सक ा है। सभी व्यावहारिरक और सरकारी उद्देश्यों के लिलए, विनण; य का अंग्रेर्जीी संस्करण प्रामाणिणक माना र्जीाएगा र्थीा विनष्पादन और विbयान्वयन के उद्देश्यों के लिलए मान्य होगा।" हमारा ध्यान पूनम बनाम उत्तर प्रदेश राज्य और अन्य (2016) 2 SCC 779 में इस न्यायालय के विनण; य की ओर आकर्षिष विकया गया है। उक्त विनण; य पर अवलम्ब ले े हुए प्रत्यर्थी5 bमांक 4 की ओर से उपस्थिस्र्थी विवद्वान अति वक्ता ने क; विदया विक अपीलार्थी5 को सुने र्जीाने की आवश्यक ा नहीं है। उसके पास मुकदमा *लाने का कोई अति कार नहीं र्थीा। पूनम (उपरोक्त) मामले में बाद के आवंविटयों को वास् व में सभी *रणों में सुना गया र्थीा।न्यायालय ने र्जीो अव ारिर विकया वह यह र्थीा विक पश्चा व 5 आवंटी अपने अति कार को स्व ंत्र रूप से स्र्थीाविप करने का प्रयास कर रही र्थीी।उन्होंने क; विदया विक उनके पास एक स्व ंत्र कानूनी अति कार है।इस न्यायालय ने पाया विक यह मानना बहु मुस्थिश्कल र्थीा विक उसके पास एक स्व ंत्र कानूनी अति कार र्थीा। सुविमत्रा देवी बनाम उत्तर प्रदेश राज्य और अन्य (सिसविवल अपील संख्या 9363-9364/2014 ) मामले में माननीय न्यायमूर्ति रंर्जीना प्रकाश देसाई और माननीय न्यायमूर्ति एन. वी. रमण ( त्कालीन न्यायमूर्ति के रूप में ) की पीठ ने विदनांक 08.10.2014 को एक आदेश पारिर विकया, सिर्जीसका प्रासंविगक सन्दभ; नी*े उद्ध ृ विकया गया हैः- “अपीलार्थी5 ने बाद में आबंविट होने के कारण 17.10.2008 को रिरट याति*का में अणिभयोग के लिलए एक आवेदन दायर विकया। उस आवेदन पर न ो विव*ार विकया गया और न ही अनुमति दी गई। xxx xxx xxx हमारी राय में अपीलक ा; के विवद्वान अति वक्ता ने क; विदया और कहा विक उच्च न्यायालय को प्रत्यर्थी5 संख्या 6 का लाइसेंस बहाल करने से पहले अपीलार्थी5 को सुनना *ाविहए र्थीा क्योंविक अपीलार्थी5 बाद में आबंविट र्थीा और उसके अति कार प्रत्यर्थी5 संख्या 6 के लाइसेंस की बहाली से प्रभाविव र्थीे।हम उद्घोषणा “क्षेत्रीय भाषा में अनुवाविद विनण; य वादी के अपनी भाषा में समझने हे ु विनबYति प्रयोग के लिलए है और विकसी अन्य उद्देश्य के लिलए प्रयोग नहीं विकया र्जीा सक ा है। सभी व्यावहारिरक और सरकारी उद्देश्यों के लिलए, विनण; य का अंग्रेर्जीी संस्करण प्रामाणिणक माना र्जीाएगा र्थीा विनष्पादन और विbयान्वयन के उद्देश्यों के लिलए मान्य होगा।" अपीलार्थी5 के विवद्वान अति वक्ता से पूरी रह सहम हैं।हमारी राय में , उच्च न्यायालय अपीलार्थी5 को सुने विबना प्रत्यर्थी5 संख्या 6 का लाइसेंस बहाल नहीं कर सक ा र्थीा क्योंविक ऐसे आदेश से उसके अति कार विनतिश्च रूप से प्रभाविव हुए र्थीे।” भले ही बाद के आबंविट ी के पास स्व ंत्र अति कार न हो, विफर भी उसे सुनवाई का अति कार है और रद्दीकरण के आदेश का ब*ाव करने के लिलए विनवेदन करने का अति कार है। यह स* है विक अपीलार्थी5 की विनयुविक्त के आदेश में कहा गया है विक आदेश अदाल में लंविब काय; वाही के परिरणाम के अ ीन है।यह अपीलक ा; को यह विदnाने की कोणिशश करके विक प्रत्यर्थी5 संख्या 4 के लिnलाफ रद्द करने का आदेश सही ढंग से पारिर विकया गया र्थीा, काय; वाही में उपस्थिस्र्थी होने और लड़ने से अयोग्य नहीं कर ा है। दनुसार, अपील को अनुमति दी र्जीा ी है।आक्षेविप विनण; य और आदेश को अपास् विकया र्जीा ा है। अपीलार्थी5 को रिरट काय; वाविहयों में पक्षकार के रूप में माना र्जीाएगा। अपीलार्थी5 को सुनवाई का उति* अवसर देने के बाद रिरट काय; वाविहयों का विनस् ारण विकया र्जीाएगा।यह देn े हुए विक काय; वाही लंबे समय से लंविब है और हम उच्च न्यायालय से अनुरो कर े हैं विक इस आदेश की एक प्रति प्राप्त होने की ारीn से ीन महीने के भी र उच्च न्यायालय में लंविब रिरट याति*का का विनस् ारण करें। ………………………… ( न्यायमूर्ति इंविदरा बनर्जी5 ) उद्घोषणा “क्षेत्रीय भाषा में अनुवाविद विनण; य वादी के अपनी भाषा में समझने हे ु विनबYति प्रयोग के लिलए है और विकसी अन्य उद्देश्य के लिलए प्रयोग नहीं विकया र्जीा सक ा है। सभी व्यावहारिरक और सरकारी उद्देश्यों के लिलए, विनण; य का अंग्रेर्जीी संस्करण प्रामाणिणक माना र्जीाएगा र्थीा विनष्पादन और विbयान्वयन के उद्देश्यों के लिलए मान्य होगा।" ………………………… ( न्यायमूर्ति ए. एस. बोपन्ना ) नई विदल्ली; 06 मई, 2022 उद्घोषणा “क्षेत्रीय भाषा में अनुवाविद विनण; य वादी के अपनी भाषा में समझने हे ु विनबYति प्रयोग के लिलए है और विकसी अन्य उद्देश्य के लिलए प्रयोग नहीं विकया र्जीा सक ा है। सभी व्यावहारिरक और सरकारी उद्देश्यों के लिलए, विनण; य का अंग्रेर्जीी संस्करण प्रामाणिणक माना र्जीाएगा र्थीा विनष्पादन और विbयान्वयन के उद्देश्यों के लिलए मान्य होगा।"