LexDraft · Judgments

State Of U.P vs Mohd. Rehan Khan

Supreme Court of India · 2022 INSC 804 · 2022

प्रति�वेद्य भार� के सव�च्च न्यायालय में सिसविवल अपीलीय क्षेत्राति�कारिर�ा सिसविवल अपील संख्या 5212/2022 (विवशेष अनुमति� याति)का (सिसविवल) संख्या 1563/2021 से उत्पन्न) उत्तर प्रदेश राज्य और अन्य अपीलार्थी5 बनाम मोहम्मद रेहान खान प्रत्यर्थी5 के सार्थी सिसविवल अपील संख्या 5213/2022 (विवशेष अनुमति� याति)का (सिसविवल) संख्या 5524/2021 से उत्पन्न) विनर्ण= य न्यायमूर्ति� डॉ. �नंजय वाई )ंद्र)ूड़ 1 अनुमति� प्रदान की गई। 2. यह अपील इलाहाबाद उच्च न्यायालय की खण्ड पीठ के 25 अगस्� 2020 विदनांविक� के विनर्ण= य से उत्पन्न हो�ी है। खण्ड पीठ ने 5 नवंबर, 2019 विदनांविक� को उच्च न्यायालय के एकल न्याया�ीश के विनर्ण= य के विवरूद्ध अपीलार्थी5गर्णों द्वारा दायर की गई अं�र-न्यायालय अपील को खारिरज कर विदया, सिजसमें उद्घोषर्णा “क्षेत्रीय भाषा में अनुवाविद� विनर्ण= य वादी के अपनी भाषा में समझने हे�ु विनब[ति�� प्रयोग के लिलए है और विकसी अन्य उद्देश्य के लिलए प्रयोग नहीं विकया जा सक�ा है। सभी व्यावहारिरक और सरकारी उद्देश्यों के लिलए , विनर्ण= य का अंग्रेजी संस्करर्ण प्रामाणिर्णक माना जाएगा �र्थीा विनष्पादन और विdयान्वयन के उद्देश्यों के लिलए मान्य होगा।" अपीलार्थी5गर्णों को विनदfश विदया गया र्थीा विक वे अनुकंपा के आ�ार पर )�ुर्थी= श्रेर्णी के पद पर विनयुविi के लिलए प्रत्यर्थी5 की अभ्यर्थिर्थी�ा पर विव)ार करें। 3. प्रत्यर्थी5 के विप�ा को उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा शाहजहांपुर में अर्थी= शास्त्र और सांख्यिख्यकी अति�कारी के काया=लय में ड्राइवर के रूप में विनयुi विकया गया र्थीा। 2015 में उनकी मौ� हो गई र्थीी। प्रत्यर्थी5 को काया=लय अर्थी= शास्त्र एवं सांख्यिख्यकी , शाहजहांपुर में जूविनयर असिसस्टेंट के �ृ�ीय श्रेर्णी के पद पर 'अस्र्थीायी �ौर पर' विनयुi विकया गया र्थीा। उत्तर प्रदेश सरकारी कम= )ारिरयों के आणिश्र�ों की सेवाकाल के दौरान मृत्यु (दसवां संशो�न) विनयमावली 20141 के विनयम 5(1) में विन�ा=रिर� श�= के अनुसार विदनांक 30 मई 2016 के विनयुविi पत्र में यह विन�ा=रिर� विकया गया है विक प्रत्यर्थी5 को एक वष= के भी�र पच्चीस शब्द प्रति� विमनट की टाइपिंपग गति� प्राप्त करनी होगी। विनयुविi पत्र का खंड 4 विनम्नलिललिख� श�v में है: "4. उत्तर प्रदेश सरकारी कम= )ारिरयों की सेवाकाल के दौरान मृत्यु (दसवां संशो�न) विनयमावली, 2014 के विनयम 5(1) में विन�ा=रिर� श�= के अनुसार आणिश्र� के रूप में विनयुi व्यविi को एक वष= के भी�र 25 शब्द प्रति� विमनट की टाइपिंपग गति� और डीओईएसीसी सोसाइटी द्वारा कंप्यूटर सं)ालन में सीसीसी प्रमार्णपत्र या सरकार द्वारा उसके समकक्ष घोविष� प्रमार्ण पत्र प्राप्त करना वांणिz� है और यविद वह ऐसा करने में विवफल रह�ा है , �ो उसकी सामान्य वार्षिषक वे�न वृतिद्ध रोक दी जाएगी और टाइपिंपग की अपेतिक्ष� गति� प्राप्त करने के लिलए उसे एक वष= की अति�रिरi अवति� प्रदान की जाएगी, और यविद विवस्�ारिर� अवति� में भी वह पुनः टंकर्ण में अपेतिक्ष� गति� प्राप्त करने में विवफल रह�ा है , �ो उसकी सेवाएं समाप्त कर दी जाएं गी।” 4. विनयमों के दसवें संशो�न द्वारा 2014 में यर्थीा संशोति�� सेवाकाल के दौरान मृत्यु विनयमावली के विनयम 5 में, सिजसे अन्य बा�ों के सार्थी-सार्थी सार्थी-सार्थी 17 1 “ विनयमावली 2014” उद्घोषर्णा “क्षेत्रीय भाषा में अनुवाविद� विनर्ण= य वादी के अपनी भाषा में समझने हे�ु विनब[ति�� प्रयोग के लिलए है और विकसी अन्य उद्देश्य के लिलए प्रयोग नहीं विकया जा सक�ा है। सभी व्यावहारिरक और सरकारी उद्देश्यों के लिलए, विनर्ण= य का अंग्रेजी संस्करर्ण प्रामाणिर्णक माना जाएगा �र्थीा विनष्पादन और विdयान्वयन के उद्देश्यों के लिलए मान्य होगा।" जनवरी 2014 विदनांविक� को अति�सूति)� विकया गया र्थीा, विनम्नलिललिख� अनुबं� शाविमल हैंः "परन्�ु यह और विक यविद विकसी ऐसे पद पर विनयुविi की जानी है सिजसके लिलए कंप्यूटर सं)ालन और टंकर्ण का ज्ञान एक आवश्यक योग्य�ा के रूप में विन�ा=रिर� विकया गया है और सरकारी कम= )ारी के आणिश्र� के पास कंप्यूटर सं)ालन और टाइपराइपिंटग में आवश्यक दक्ष�ा नहीं है , उसे इस श�= के अ�ीन विनयुi विकया जाएगा विक वह एक वष= के भी�र टाइपराइपिंटग में 25 शब्द प्रति� विमनट की आवश्यक गति� के सार्थी डीओईएसीसी सोसाइटी द्वारा प्रदान विकए गए कंप्यूटर ऑपरेशन में सीसीसी प्रमार्णपत्र या सरकार द्वारा मान्य�ा प्राप्त संस्र्थीान से समकक्ष प्रमार्ण पत्र प्राप्त करेगा और यविद वह ऐसा करने में विवफल रह�ा है, �ो उसकी सामान्य वार्षिषक वे�न वृतिद्ध रोक दी जाएगी और उसे कंप्यूटर सं)ालन में आवश्यक प्रमार्णपत्र और टाइपराइपिंटग में आवश्यक गति� प्राप्त करने के लिलए एक वष= की अति�रिरi अवति� दी जाएगी और यविद विवस्�ारिर� अवति� में भी वह विफर से आवश्यक प्रमार्णपत्र कंप्यूटर सं)ालन और आवश्यक गति� टाइपराइपिंटग प्राप्त करने में विवफल रह�ा है , �ो उसकी सेवाएं समाप्त कर दी जाएं गी।” 5. प्रत्यर्थी5 ने कंप्यूटर दक्ष�ा प्रमार्ण पत्र प्राप्त कर लिलया। वह टाइपिंपग टेस्ट के अपने पहले प्रयास में विवफल रहा। उसे विदनांक 20 मा)= 2017 को एक काया=लय आदेश द्वारा सूति)� विकया गया र्थीा विक उसकी टाइपिंपग गति� केवल 6 शब्द प्रति� विमनट है और इसलिलए उसने प्रति� विमनट 25 शब्दों की अपेतिक्ष� गति� प्राप्त नहीं की है। इसके बाद, उसे 7 अगस्� 2019 को टाइपिंपग टेस्ट पास करने का द स ू रा अवसर विदया गया। विदनांक 8 अगस्� 2019 को यह अति�सूति)� विकया गया विक प्रत्यर्थी5 टाइपिंपग टेस्ट में पास नहीं हु आ र्थीा। 11 सिस�ंबर 2019 को, बरेली तिडवीजन के उप विनदेशक (आर्थिर्थीक और सांख्यिख्यकी) ने प्रत्यर्थी5 की सेवाओं को समाप्त कर विदया। उद्घोषर्णा “क्षेत्रीय भाषा में अनुवाविद� विनर्ण= य वादी के अपनी भाषा में समझने हे�ु विनब[ति�� प्रयोग के लिलए है और विकसी अन्य उद्देश्य के लिलए प्रयोग नहीं विकया जा सक�ा है। सभी व्यावहारिरक और सरकारी उद्देश्यों के लिलए, विनर्ण= य का अंग्रेजी संस्करर्ण प्रामाणिर्णक माना जाएगा �र्थीा विनष्पादन और विdयान्वयन के उद्देश्यों के लिलए मान्य होगा।" 6. प्रत्यर्थी5 ने इलाहाबाद उच्च न्यायालय के समक्ष संविव�ान के अनुच्zे द 226 के �ह� एक रिरट याति)का दायर की सिजसमें प्रत्यर्थी5 के रोजगार को समाप्त करने के 11 सिस�ंबर 2019 विदनांविक� आदेश और याति)काक�ा= को उसे सेवा में बहाल करने का विनदfश देने वाला परमादेश को रद्द करने की मांग की गई र्थीी। प्रत्यर्थी5 का यह �क= र्थीा विक जब वह टाइपिंपग टेस्ट दे रहा र्थीा, कंप्यूटर में खराबी र्थीी, और यह विक समाविप्त का आदेश कारर्ण ब�ाओ नोविटस जारी विकए विबना जारी विकया गया र्थीा। विदनांक 5 नवंबर, 2019 को विदए गए एक विनर्ण= य के अनुसार, उच्च न्यायालय के एकल न्याया�ीश ने पहले के एक विनर्ण= य पर अवलम्ब लिलया। मुकु ल सागर बनाम उत्तर प्रदेश राज्य23 के मामले में विदया गया विनर्ण= य सिजसमें इलाहाबाद उच्च न्यायालय के एकल न्याया�ीश ने अणिभविन�ा=रिर� विकया विक हालांविक अनुकंपा के आ�ार पर विनयुi कम= )ारी को 2014 के विनयमों के विनयम 5 के अनुसार के पद से हटा विदया जाना )ाविहए, लेविकन अति�कारी वग= 4 के पद पर विनयुविi के दावे पर विव)ार कर सक�े र्थीे। यह पाया गया विक इस �रह की व्याख्या सहानुभूति�पूर्ण= विनयुविi के उद्देश्य के अनुरूप होगी।एकल न्याया�ीश ने इस विनदfश के सार्थी रिरट याति)का विनस्�ारिर� विकया विक मुकुल सागर (उपरोi) में विकये गए अवलोकनों के मद्देनजर प्रत्यर्थी5 के सेवा की समाविप्त पर विफर से विव)ार और दो महीने के भी�र एक नया आदेश पारिर� विकया जाना )ाविहए। एकल न्याया�ीश ने विनम्नलिललिख� विनदfश विदयाः "उपरोi �थ्यों और परिरख्यिस्र्थीति�यों को ध्यान में रख�े हु ए , इस रिरट याति)का का विनस्�ारर्ण प्रत्यर्थी5 संख्या 3 को इस मुद्दे पर विफर से विव)ार करने और इस न्यायालय द्वारा विदनांक 4.7.2018 के उi आदेश में विकए गए अवलोकन को ध्यान में रखने के विनदfश के सार्थी विकया जा�ा है और इस आदेश की प्रमाणिर्ण� प्रति� की प्रस्�ु� करने की �ारीख से दो महीने की अवति� के भी�र एक नया 2 दि�नांक 4 जुलाई 2018 क ो निर्णीत रिट याचिका संख्या दिनर्णी�त रिट याचिका संख्या दि�ट याचिका संख्या यादि�क ा संख्या 12737/2018 3 दि�नांक 4 जुलाई 2018 क ो निर्णीत रिट याचिका संख्या दिनर्णी�त रिट याचिका संख्या दि�ट याचिका संख्या यादि�क ा संख्या 12737/2018 उद्घोषर्णा “क्षेत्रीय भाषा में अनुवाविद� विनर्ण= य वादी के अपनी भाषा में समझने हे�ु विनब[ति�� प्रयोग के लिलए है और विकसी अन्य उद्देश्य के लिलए प्रयोग नहीं विकया जा सक�ा है। सभी व्यावहारिरक और सरकारी उद्देश्यों के लिलए, विनर्ण= य का अंग्रेजी संस्करर्ण प्रामाणिर्णक माना जाएगा �र्थीा विनष्पादन और विdयान्वयन के उद्देश्यों के लिलए मान्य होगा।" आदेश पारिर� विकया जाए।"इस याति)का में विववाविद� आदेश संबंति�� प्राति�कारी द्वारा पारिर� विकए जाने वाले नए आदेशों के अ�ीन रहेगा।" 7. इलाहाबाद उच्च न्यायालय की खंडपीठ ने 25 अगस्� 2020 को यह देख�े हु ए अपील खारिरज कर विदया विक प्रत्यर्थी5 की पहले ही सेवा से समाप्त कर दी गई है और एकल न्याया�ीश ने केवल यह विनदfश विदया र्थीा विक प्रत्यर्थी5 के मामले पर )�ुर्थी= श्रेर्णी संवग= में नए सिसरे से अनुकम्पा के आ�ार पर विनयुविi के लिलए विव)ार विकया जाए। 8. हमने अपीलार्थी5 की ओर से पेश होने वाले अति�वiा श्री अंविक� गोयल और प्रत्यर्थी5 के अति�वiा श्री दाविनश जुबरै खान और श्री जयप्रकाश सोमानी को सुना। 9. प्रत्यर्थी5 की विनयुविi आदेश में यह विन�ा=रिर� विकया गया र्थीा विक उसे कंप्य ूटर ज्ञान के संबं� में प्रमार्ण पत्र प्राप्त करना होगा और विन�ा=रिर� अवति� के भी�र 25 शब्दों प्रति� विमनट की गति� के सार्थी टाइपिंपग टेस्ट पास करना होगा। ऊपर उसिŠलिख� विनयमावली 2014 के विनयम 5(1) का प्राव�ान यह दर्थिश� कर�ा है विक यविद कोई अभ्यर्थी5 एक वष= के भी�र 25 शब्द प्रति� विमनट की टाइपिंपग गति� प्राप्त करने में विवफल रह�ा है �ो वार्षिषक वे�न वृतिद्ध रोक दी जाएगी और अपेतिक्ष� गति� प्राप्त करने के लिलए अभ्यर्थी5 को एक वष= की अति�रिरi अवति� दी जाएगी।यविद कोई अभ्यर्थी5 बढ़ी हुई अवति� के भी�र ऐसा करने में विवफल रह�ा है , �ो विनयमों में यह प्राव�ान है विक उसकी सेवाओं को समाप्त कर विदया जाएगा। कंप्यूटर में दक्ष�ा का प्रमार्ण पत्र प्राप्त करने के संबं� में एक समान श�= लागू हो�ी है।अ�ः टाइपिंपग टेस्ट को पास आदेश में विवफल रहने के कारर्ण अपीलार्थी5 की सेवाओ ं की समाविप्त विनयुविi के आदेश में विनविह� अनुबं� के सार्थी -सार्थी विनयमावली 2014 के विनयम 5(1) के प्राव�ानों के संदभ= में र्थीी। उद्घोषर्णा “क्षेत्रीय भाषा में अनुवाविद� विनर्ण= य वादी के अपनी भाषा में समझने हे�ु विनब[ति�� प्रयोग के लिलए है और विकसी अन्य उद्देश्य के लिलए प्रयोग नहीं विकया जा सक�ा है। सभी व्यावहारिरक और सरकारी उद्देश्यों के लिलए, विनर्ण= य का अंग्रेजी संस्करर्ण प्रामाणिर्णक माना जाएगा �र्थीा विनष्पादन और विdयान्वयन के उद्देश्यों के लिलए मान्य होगा।" 10. उच्च न्यायालय का यह विनदfश विक प्रत्यर्थी5 को )�ुर्थी= श्रेर्णी के पद के लिलए माना जाना कानून के प्राव�ानों के अनुरूप नहीं है।अनुकंपा विनयुविi का कोई विनविह� अति�कार नहीं है।यह सुस्र्थीाविप� है विक अनुकंपा विनयुविi संविव�ान के अनुच्zे द 16 का एक अपवाद है जो साव= जविनक रोजगार 4 के मामलों में अवसर की समान�ा के सिसद्धां� का प्र�ीक है। वे�नभोगी कम= )ारी की मृत्यु के कारर्ण उत्पन्न परिरवार के विवत्तीय संकट से विनपटने के लिलए विकसी मृ�क कम= )ारी के परिरवार से संबंति�� व्यविi को अनुकंपा विनयुविi दी जा�ी है।अनुकंपा विनयुविi को शासिस� करने वाले विनयमों या योजना के �ह� सिजन श�v पर अनुकंपा विनयुविi की पेशकश की जा�ी है, उनका पालन करना होगा। 11. प्रत्यर्थी5 ने अर्थी= शास्त्र और सांख्यिख्यकी काया=लय में सहायक के रूप में विनयुविi की मांग की और उसे ऐसी विनयुविi प्रदान की गई। अनुकंपा के आ�ार पर विनयुi विकए गए कम= )ारी को संबंति�� विनयमों के �ह� अनुपालन की जाने वाली सेवा श�v में से कोई zू ट नहीं दी जा�ी है। अनुकंपा विनयुविi से संबंति�� विनयमों की व्याख्या इस बा� को ध्यान में रख�े हुए की जानी )ाविहए विक यह अवसर की समान�ा के सिसद्धां�5 का एक अपवाद है। अनुकंपा विनयुविi प्रवेश स्�र की zू ट प्रदान कर�ी है। इस विनयुविi का उपयोग केवल इसलिलए नहीं विकया जा सक�ा विक विनयुविi अनुकंपा के आ�ार पर की गई र्थीी। जब �क विक विनयम विन�ा=रिर� न हो , बाद में दी गई कोई भी zू ट संविव�ान के अनुच्zे द 14 और 16 में परिरकख्यिŒप� सिसद्धां� का उŠंघन करेगी। अनुकंपा के आ�ार पर विनयुविi केवल उस कम= )ारी के परिरवार को प्रदान की जा�ी है, सिजसकी काय= काल के दौरान मृत्यु हो जा�ी है, जो विनयुविi के कई �रीकों में से एक है। एक बार विनयुविi हो जाने के बाद , विनयुविi के 4 महाप्रबं�क, भार�ीय स्टेट बैंक बनाम अंजू जैन, (2008) 8 एससीसी 475; णिशवमूर्ति� बनाम आं ध्र प्रदेश राज्य, (2008) 13 एससीसी 5 उत्तरां)ल जल संस्र्थीान बनाम लक्ष्मी देवी, (2009) 7 एससीसी 205; झारखंड राज्य बनाम णिशव करमपाल साहू , (2009) 11 एससीसी 453। उद्घोषर्णा “क्षेत्रीय भाषा में अनुवाविद� विनर्ण= य वादी के अपनी भाषा में समझने हे�ु विनब[ति�� प्रयोग के लिलए है और विकसी अन्य उद्देश्य के लिलए प्रयोग नहीं विकया जा सक�ा है। सभी व्यावहारिरक और सरकारी उद्देश्यों के लिलए, विनर्ण= य का अंग्रेजी संस्करर्ण प्रामाणिर्णक माना जाएगा �र्थीा विनष्पादन और विdयान्वयन के उद्देश्यों के लिलए मान्य होगा।" �रीके की परवाह विकए विबना सभी कम= )ारिरयों के सार्थी समान व्यवहार विकया जाएगा, जब �क विक संबंति�� विनयम अन्यर्थीा विन�ा=रिर� न करें।विनयमावली 2014 के विनयम 5(1)(i) ) में कहा गया है विक विकसी व्यविi को अनुकंपा के आ�ार पर विकसी पद पर विनयुi करने के लिलए उसे विन�ा=रिर� शैक्षणिर्णक योग्य�ा पूरी करनी होगी।विनयम 5 का प्रासंविगक उद्धरर्ण इस प्रकार हैः “5. (1) यविद इन विनयमों के प्रारंभ होने के बाद विकसी सरकारी कम= )ारी की सेवा में रह�े हुए मृत्यु हो जा�ी है और मृ�क सरकारी कम= )ारी का पति�/पत्नी पहले से ही केंद्र सरकार , राज्य सरकार या केंद्र सरकार के स्वाविमत्व या विनयंत्रर्ण वाले विकसी विनगम या राज्य सरकार के अ�ीन विनयोसिज� नहीं है , �ो उसके परिरवार के एक सदस्य को, जो पहले से ही केंद्र सरकार या राज्य सरकार के स्वाविमत्व या विनयंत्रर्ण वाले विकसी विनगम या केंद्र सरकार या राज्य सरकार के अ�ीन विनयोसिज� नहीं है , इस उद्देश्य के लिलए आवेदन करने पर, सामान्य भ�5 विनयमों में zू ट दे�े हुए सरकारी सेवा में उपयुi रोजगार विदया जाएगा, सिसवाय इसके विक वह उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग के अति�कार क्षेत्र में हो, विकसी पद पर सामान्य भ�5 विनयमों में zू ट के �ह� यविद ऐसा व्यविi - (i) ) पद के लिलए विन�ा=रिर� शैतिक्षक योग्य�ा को पूरा कर�ा हो।" (i) i) ) (प्रभाव वर्ति��) 12. विनयम 5(1)(i) ) में प्रवेश स्�र पात्र�ा मानदंड विन�ा=रिर� विकया गया है। विनयम 5 का पहला प्राव�ान एक अति�रिरi योग्य�ा विन�ा=रिर� कर�ा है यविद विकसी पद पर विनयुविi की जा�ी है सिजसके लिलए कंप्यूटर और टाइपिंपग का ज्ञान एक आवश्यक योग्य�ा के रूप में विन�ा=रिर� है। विनयम के अनुसार विन�ा=रिर� समय अवति� के भी�र विनयुi व्यविi द्वारा यह योग्य�ा अर्जिज� की जानी )ाविहए। हालांविक प्रत्यर्थी5 के पास विनयमों के �ह� विन�ा=रिर� शैक्षणिर्णक योग्य�ा र्थीी, लेविकन उसने विनयम 5 (1)(i) ) के उद्घोषर्णा “क्षेत्रीय भाषा में अनुवाविद� विनर्ण= य वादी के अपनी भाषा में समझने हे�ु विनब[ति�� प्रयोग के लिलए है और विकसी अन्य उद्देश्य के लिलए प्रयोग नहीं विकया जा सक�ा है। सभी व्यावहारिरक और सरकारी उद्देश्यों के लिलए, विनर्ण= य का अंग्रेजी संस्करर्ण प्रामाणिर्णक माना जाएगा �र्थीा विनष्पादन और विdयान्वयन के उद्देश्यों के लिलए मान्य होगा।" प्राव�ानों के �ह� विन�ा=रिर� योग्य�ा हासिसल नहीं की। इस न्यायालय ने पूव= में पात्र�ा मानदंड और अति�रिरi योग्य�ाओं6 दोनों की प्रासंविगक�ा को समझाया है। प्रत्यर्थी5 के पास उi पद पर बने रहने के लिलए पात्र�ा मानदंड और योग्य�ा दोनों होनी )ाविहए। सहायक के पद पर विनयुविi विमलने के बाद, प्रत्यर्थी5 को कंप्यट ू र में प्रवीर्ण�ा का प्रमार्ण पत्र (जो उसने विकया र्थीा) और विन�ा=रिर� अवति� के भी�र टाइपिंपग में अपेतिक्ष� गति� प्राप्त करना (जो उसने दो अवसरों के बावजूद नहीं विकया) प्राप्त करने की दोहरी श�v को पूरा करना र्थीा।विकसी वैकख्यिŒपक पद पर विनयुविi का विनदfश उच्च न्यायालय द्वारा नहीं विदया जा सक�ा है। इससे )�ुर्थी= श्रेर्णी के पद में अन्य की स्र्थीान पर प्रवेश की अनुमति� होगी, जो अनुकंपा के आ�ार पर विनयुविi की प्र�ीक्षा कर रहे हैं या जो लोग प्रति�योविग�ा में विनयुविi )ाह�े हैं वे इसके पात्र होंगे। 13. मुकुल सागर (उपरोi) मामले में अपने पूव= विवविनश्चय पर अवलम्ब ले�े हु ए उच्च न्यायालय द्वारा लिलया गया दृवि”कोर्ण स्प” रूप से गल� र्थीा। �र्थीाविप, हम यह स्प” कर�े हैं विक यद्यविप हमने यह अणिभविन�ा=रिर� विकया है विक मुकुल सागर (उपरोi) याति)काक�ा= में विवति� का सही सिसद्धां� अति�कणिर्थी� नहीं विकया गया है , व�= मान विनर्ण= य का यह अर्थी= नहीं लगाया जाना )ाविहए विक राज्य को विनयुविi में बा�ा डालने का विनदेश विदया गया है जो मुकुल सागर के मामले में या)ी को प्रदान विकया गया हो सक�ा है। 14. उपरोi कारर्ण से , व�= मान मामले में हम अपील में एकल न्याया�ीश और खण्ड पीठ के विव)ारों से सहम� होने में असमर्थी= हैं। 15. खंडपीठ के विदनांक 25 अगस्� 2020 के आक्षेविप� विनर्ण= य और विदनांक 5 नवंबर 2019 के एकल न्याया�ीश के विनर्ण= य को अपास्� कर�े हु ए अपील 6 प्री�ी श्रीवास्�व बनाम मध्य प्रदेश राज्य, (1999) 7 एससीसी 120; गुजरा� राज्य बनाम अरविवन्द कु मार टी. ति�वारी, एआईआर 2012 एससी 3281 उद्घोषर्णा “क्षेत्रीय भाषा में अनुवाविद� विनर्ण= य वादी के अपनी भाषा में समझने हे�ु विनब[ति�� प्रयोग के लिलए है और विकसी अन्य उद्देश्य के लिलए प्रयोग नहीं विकया जा सक�ा है। सभी व्यावहारिरक और सरकारी उद्देश्यों के लिलए, विनर्ण= य का अंग्रेजी संस्करर्ण प्रामाणिर्णक माना जाएगा �र्थीा विनष्पादन और विdयान्वयन के उद्देश्यों के लिलए मान्य होगा।" स्वीकार की जा�ी है। उच्च न्यायालय के समक्ष प्रत्यर्थी5 द्वारा संख्यिस्र्थी� रिरट याति)का इन परिरख्यिस्र्थीति�यों में खारिरज हो जाएगी। 16. लंविब� आवेदन, यविद कोई हो, विनस्�ारिर� विकया जा�ा है। सिसविवल अपील संख्या 5213/2022 (विवशेष अनुमति� याति)का (सिसविवल) संख्या 5524/2021 से उत्पन्न) 1 अनुमति� प्रदान की गई। 2. प्रत्यर्थी5 की माँ अर्थी= एवं सांख्य अति�कारी , मर्थीुरा के काया=लय में वरिरष्ठ सहायक के रूप में काय= र� र्थीी।वष= 2015 में उनकी मृत्यु हो गई र्थीी। प्रत्यर्थी5 ने अनुकंपा के आ�ार पर विनयुविi के लिलए आवेदन विकया और उसे कविनष्ठ सहायक के पद पर विनयुविi दी गई। विदनांक 30 मई, 2016 के विनयुविi आदेश में विनयमावली 2014 के विनयम 5(1) की ओर ध्यान आकृ” विकया गया है। प्रत्यर्थी5 विदनांक 16 मा)= 2017 और 17 जुलाई 2019 को टाइपिंपग टेस्ट में विवफल रहा। विदनांक 31 जुलाई 2019 के एक आदेश द्वारा, प्रत्यर्थी5 की सेवाओं को समाप्त कर विदया गया र्थीा। प्रत्यर्थी5 ने सेवा समाविप्त के आदेश को )ुनौ�ी दी और बहाली के राह� की मांग कर�े हुए एक रिरट याति)का7 दायर की। उच्च न्यायालय के एकल न्याया�ीश ने विदनांक 21 नवंबर, 2019 को अपने विनर्ण= य में मुकुल सागर बनाम उत्तर प्रदेश राज्य के मामले में पूव= के विनर्ण= य पर अवलम्ब लिलया और याति)काक�ा=ओ ं को इस मुद्दे पर विफर से विव)ार करने का विनदfश विदया। खण्ड पीठ ने विदनांक 2 सिस�ंबर, 2020 को अपने विनर्ण= य में स्पेशल अपील तिडफेख्यि—टव संख्या 7 रिरट याति)का (सिसविवल) संख्या 18189/2019 उद्घोषर्णा “क्षेत्रीय भाषा में अनुवाविद� विनर्ण= य वादी के अपनी भाषा में समझने हे�ु विनब[ति�� प्रयोग के लिलए है और विकसी अन्य उद्देश्य के लिलए प्रयोग नहीं विकया जा सक�ा है। सभी व्यावहारिरक और सरकारी उद्देश्यों के लिलए, विनर्ण= य का अंग्रेजी संस्करर्ण प्रामाणिर्णक माना जाएगा �र्थीा विनष्पादन और विdयान्वयन के उद्देश्यों के लिलए मान्य होगा।" 169/20208 में अपने फैसले पर अवलम्ब ले�े हुए उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा दायर विवशेष अपील9 को खारिरज कर विदया। 3. )ूँविक एकल न्याया�ीश द्वारा सिजस विनर्ण= य पर अवलम्ब लिलया गया है और मोहम्मद रेहान मामले में खंडपीठ के विनर्ण= य को उपरोi विनर्ण= य में अस्वीकृ � कर विदया गया है, खंडपीठ के विनर्ण= य विदनांक 2 सिस�ंबर 2020 और एकल न्याया�ीश के विनर्ण= य विदनांक 21 नवंबर 2019 को रद्द करके व�= मान अपील को स्वीकार विकया जाएगा। प्रत्यर्थी5 द्वारा उच्च न्यायालय के समक्ष दायर की गई रिरट याति)का खारिरज हो जाएगी। 4 उपरोi श�v में अपील को अनुमति� दी जा�ी है। 5. लंविब� आवेदन, यविद कोई हो, को विनस्�ारिर� विकया जा�ा है। ......…......………………...… [न्यायमूर्ति� डॉ. �नंजय वाई )ंद्र)ूड़] ......…......………………...… [न्यायमूर्ति� ए. एस. बोपन्ना] नई विदŠी; 08 अगस्�, 2022 सीकेबी 8 स्पेशल अपील तिडफेख्यि—टव संख्या 168/2020 9 उत्तर प्रदेश राज्य बनाम मोहम्मद रेहान खान विदनांक 25 अगस्� 2020 उद्घोषर्णा “क्षेत्रीय भाषा में अनुवाविद� विनर्ण= य वादी के अपनी भाषा में समझने हे�ु विनब[ति�� प्रयोग के लिलए है और विकसी अन्य उद्देश्य के लिलए प्रयोग नहीं विकया जा सक�ा है। सभी व्यावहारिरक और सरकारी उद्देश्यों के लिलए, विनर्ण= य का अंग्रेजी संस्करर्ण प्रामाणिर्णक माना जाएगा �र्थीा विनष्पादन और विdयान्वयन के उद्देश्यों के लिलए मान्य होगा।"